
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

कांग्रेस और INDIA गठबंधन के आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित ‘चलो दिल्ली’ मार्च को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर कार्यक्रम और कथित चुनावी अनियमितताओं के विरोध में इस प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शन के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी। वहीं इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रही है, लेकिन चुनाव परिणामों में मिली असफलताओं पर आत्ममंथन नहीं कर रही है। पाठक ने हाल में हुए विधान परिषद चुनावों का जिक्र करते हुए दावा किया कि बैलेट पेपर से मतदान होने के बावजूद कांग्रेस को कोई सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया पर आरोप लगाकर अपनी राजनीतिक कमजोरियों को छिपाने का प्रयास कर रही है।




हनी पाठक ने कांग्रेस पर संगठनात्मक गुटबाजी का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी खुद कई गुटों में बंटी हुई है। उन्होंने दावा किया कि जब तक कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता एकजुट नहीं होंगे, तब तक बड़े आंदोलन और राजनीतिक प्रदर्शन भी पार्टी की संगठनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने संगठन की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और उसके बाद चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने चाहिए।


भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की उत्तराखंड के लोगों के संदर्भ में की गई विवादित टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। हनी पाठक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ऐसे राजनीतिक दल के साथ गठबंधन में है, जिसके नेतृत्व की टिप्पणी से उत्तराखंड के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि वह इस टिप्पणी से सहमत है या इसका विरोध करती है।

हनी पाठक ने अपने बयान में कांग्रेस को समाजवादी पार्टी से राजनीतिक संबंध तोड़ने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड की जनता के सम्मान की बात करती है, लेकिन उसे अपने सहयोगी दल के नेता की टिप्पणी पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया बताने वाली टिप्पणी को किस आधार पर उचित ठहराया जा सकता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इस विषय पर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखने की मांग की।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा आंदोलन बताया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर प्रक्रिया पर रोक और कथित रूप से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग भी उठाई है। हालांकि, कथित वोट चोरी के आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।



दिल्ली में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विपक्षी गठबंधन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 1 नवंबर को दोपहर 12 बजे मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से मार्च शुरू होकर रामलीला मैदान पहुंचेगा। दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम के लिए आवश्यक शर्तों के साथ अनुमति दी है। रैली के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और यातायात संचालन को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। कांग्रेस ने देशभर से पार्टी कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों के नेताओं से इस कार्यक्रम में भाग लेने का आह्वान किया है।

फिलहाल दिल्ली में प्रस्तावित ‘चलो दिल्ली’ मार्च को लेकर उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। एक ओर कांग्रेस और INDIA गठबंधन चुनावी पारदर्शिता तथा मतदाताओं के अधिकारों को लेकर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति, संगठनात्मक स्थिति और समाजवादी पार्टी के साथ उसके गठबंधन पर सवाल उठाए हैं। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश में इस प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब सभी की नजरें 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाले विपक्षी दलों के प्रदर्शन पर टिकी हैं।

