गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग पर 14वें दिन भी धरना जारी, आंदोलनकारियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग पर 14वें दिन भी धरना जारी, आंदोलनकारियों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में चल रहा धरना शनिवार को 14वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक गैरसैंण को प्रदेश की स्थायी राजधानी घोषित नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों राजनीतिक दलों पर उत्तराखंड की जनता की भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। एनपीयू न्यूज ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों से बातचीत की और उनकी मांगों तथा आगे की रणनीति को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग की।

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर आंदोलनकारी लगातार क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के समय पहाड़ के विकास, पलायन रोकने और पर्वतीय क्षेत्रों को प्रशासनिक प्राथमिकता देने की जो उम्मीदें थीं, वे आज भी पूरी नहीं हो पाई हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि उत्तराखंड आंदोलन की मूल भावनाओं और पहाड़ की पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

धरना स्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों ने कहा कि प्रदेश की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए अब संघर्ष को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो क्रमिक अनशन को आमरण अनशन में तब्दील किया जा सकता है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांग पूरी होने तक धरना स्थल से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, राज्य आंदोलनकारियों और आम नागरिकों से भी इस मुद्दे पर समर्थन देने की अपील की है।

इस दौरान आंदोलनकारियों ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद दोनों दलों को सरकार चलाने का अवसर मिला, लेकिन गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने का निर्णय नहीं लिया गया। आंदोलनकारियों ने कहा कि राजनीतिक दल चुनाव के समय पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और गैरसैंण के महत्व की बात करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद स्थायी राजधानी का मुद्दा लंबित रह जाता है। उन्होंने इसे पहाड़ की जनता की भावनाओं की उपेक्षा बताया।

गौरतलब है कि गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इसे स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। हाल ही में भराड़ीसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान भी यह मुद्दा चर्चा में रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने और ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में इसकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया था। वहीं विभिन्न संगठनों ने सरकार से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का निर्णय लेने की मांग की थी।

आंदोलनकारियों का कहना है कि पहाड़ की जनता ने अलग उत्तराखंड राज्य के लिए लंबा संघर्ष किया था। राज्य आंदोलन के दौरान लोगों ने बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास का सपना देखा था। उनके अनुसार, गैरसैंण में स्थायी राजधानी स्थापित होने से पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं को शासन और प्रशासन के सामने अधिक प्रभावी ढंग से रखा जा सकेगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पहाड़ की जनता की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और गैरसैंण की राजधानी का सपना पूरा किया जाना चाहिए।

एनपीयू न्यूज की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय लेना होगा। आंदोलन से जुड़े लोगों ने बताया कि धरना और क्रमिक अनशन लगातार जारी रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने और आमरण अनशन शुरू करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। हालांकि, आंदोलन के अगले चरण की अंतिम तारीख अभी स्पष्ट नहीं की गई है।

फिलहाल गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर हल्द्वानी में चल रहा आंदोलन 14वें दिन भी जारी है। एक ओर आंदोलनकारी भाजपा और कांग्रेस पर राजधानी के मुद्दे को लंबित रखने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार से ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं। क्रमिक अनशन को आमरण अनशन में बदलने की चेतावनी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। अब देखना होगा कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा क्या रहती है।