
स्थान : कोटद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के कोटद्वार में पशुओं की लगातार हो रही मौतों से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र की एक डेयरी में चार गायों की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य स्थानों पर भी मवेशियों की मौत और बीमार होने के मामले सामने आए हैं। पशुओं की मौत के बाद कराई गई जांच में पशु आहार में जहरीले रसायन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली की जांच रिपोर्ट में पशु आहार में बेंजीन हेक्साक्लोराइड नामक ऑर्गेनोक्लोरीन रसायन पाया गया है। इस खुलासे के बाद पशु आहार की गुणवत्ता और उसकी सुरक्षित आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, कोटद्वार के हरसिंहपुर क्षेत्र में पशुपालक हीरा भंडारी की डेयरी में 23 अक्टूबर को चार गायों की मौत हो गई थी। वहीं घमंडपुर क्षेत्र में भी पशुओं की मौत के मामले सामने आए। गायों की मौत और अन्य मवेशियों के बीमार होने से पशुपालक परेशान हैं। पशुओं की अचानक बिगड़ती हालत को देखते हुए पशुपालन विभाग की टीम ने मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक स्तर पर पशुओं द्वारा किसी जहरीले पदार्थ का सेवन किए जाने की आशंका जताई गई।





बीमार पशुओं का उपचार करने पहुंचे वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि एक बीमार बछिया का उपचार किया गया, लेकिन उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद पशुओं के जहरीला पदार्थ खाने की आशंका को देखते हुए विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया गया। मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया गया और पशुओं के अंगों, रक्त तथा उन्हें खिलाए गए पशु आहार के नमूने जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली भेजे गए।


जांच रिपोर्ट में पशु आहार में बेंजीन हेक्साक्लोराइड नामक रसायन की मौजूदगी की पुष्टि हुई। यह ऑर्गेनोक्लोरीन समूह का रसायन है, जिसे गैमेक्सेन या लिंडेन के नाम से भी जाना जाता है। यह रसायन पशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है। हालांकि, पशु आहार में यह रसायन किस स्तर पर और किस कारण से पहुंचा, इसकी पूरी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। आशंका जताई गई है कि भंडारण के दौरान पशु आहार किसी रसायन के संपर्क में आने से दूषित हुआ हो सकता है।

पशु चिकित्साधिकारी ने पशुपालकों से अपील की है कि बाजार से पशु आहार खरीदते समय उसकी गुणवत्ता के साथ निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट की जांच जरूर करें। उन्होंने बताया कि बाजार में बिकने वाले कुछ पशु आहार के पैकेटों पर निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि स्पष्ट रूप से अंकित नहीं होती। ऐसे में पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने संदिग्ध पशु आहार के इस्तेमाल से बचने और पशुओं में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी।

वहीं मामला सामने आने के बाद पशु आहार निर्माता कंपनी एसपी सॉल्वेंट की टीम भी कोटद्वार पहुंची। कंपनी के प्रतिनिधियों ने मामले की जानकारी जुटाने के साथ स्थानीय वितरक के गोदाम का निरीक्षण किया। कंपनी के एरिया मैनेजर दीपक शर्मा ने बताया कि उनकी कंपनी पिछले 55 वर्षों से पशु आहार के उत्पादन से जुड़ी हुई है। उन्होंने दावा किया कि उपभोक्ताओं के विश्वास के चलते कंपनी प्रतिदिन करीब सात हजार बैग पशु आहार का उत्पादन करती है।



कंपनी के एरिया मैनेजर दीपक शर्मा ने दावा किया कि कंपनी अपने पशु आहार में किसी प्रकार के हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं करती और उत्पाद को ऑर्गेनिक तरीके से तैयार किया जाता है। उन्होंने कहा कि कंपनी का पशु आहार पशुओं में दूध उत्पादन और दूध में फैट की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। कंपनी ने अपने उत्पाद को सुरक्षित बताते हुए मामले की जांच की बात कही है। हालांकि, जांच रिपोर्ट में संबंधित पशु आहार के नमूने में जहरीला रसायन मिलने के बाद उसके स्रोत और दूषित होने के कारणों का पता लगाना महत्वपूर्ण हो गया है।

फिलहाल कोटद्वार में चार गायों की मौत और अन्य पशुओं के बीमार होने के मामलों ने पशु आहार की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट में जहरीला रसायन मिलने से पशुपालकों में चिंता बनी हुई है। वहीं निर्माता कंपनी अपने उत्पाद को सुरक्षित बता रही है। ऐसे में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि पशु आहार निर्माण, परिवहन या भंडारण के किस चरण में दूषित हुआ। पशुपालकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

