
रिपोर्टर : विशेष शर्मा
स्थान : बाज़पुर/ऊधम सिंह नगर

उत्तराखंड के जंगलों से सटे हाईवे और रेलवे ट्रैक पर हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही आम लोगों के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी खतरे का सबब बनती जा रही है। नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जिले में सामने आई अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर वन्यजीव सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं सड़क पर अचानक हाथी के आ जाने से वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं, तो कहीं ट्रेन की चपेट में आने से हाथियों की जान जा रही है।

नैनीताल-हल्द्वानी हाईवे पर अचानक हाथी के सड़क पर आ जाने से यातायात बाधित हो गया। हाथी को सड़क के बीच खड़ा देखकर दोनों ओर वाहन रुक गए और जाम की स्थिति पैदा हो गई। इस दौरान एक राहगीर ने पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सड़क पर हाथी की मौजूदगी से वाहन चालकों और राहगीरों में भय का माहौल देखने को मिला।





वहीं, ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर-कालाढूंगी हाईवे पर भी बीती शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब जंगल से निकलकर एक विशालकाय एकदंत हाथी अचानक सड़क पर आ पहुंचा। हाथी को देखकर वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियां रोक दीं। काफी देर तक हाथी सड़क पर ही डटा रहा, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं। राहगीरों ने इस घटना का वीडियो भी बनाया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। काफी देर बाद हाथी के जंगल की ओर लौटने पर यातायात सामान्य हो सका।


दूसरी ओर, ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर क्षेत्र में हल्दी और छतरपुर रेलवे स्टेशनों के बीच मंगलवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में नर हाथी की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, रात करीब 11 बजे रेलवे ट्रैक के पिलर संख्या 55/8 के पास लालकुआं से हावड़ा जा रही बाघ एक्सप्रेस की चपेट में आने से हाथी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि हाथी का एक दांत भी टूट गया। हादसे में रेलवे की विद्युत लाइन को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।



प्रत्यक्षदर्शी अमनदीप के अनुसार, ट्रेन चालक लगातार हॉर्न बजा रहा था। इस दौरान हाथियों का एक झुंड रेलवे ट्रैक पार कर गया, लेकिन एक हाथी ट्रेन के सामने आ गया और हादसे का शिकार हो गया। दुर्घटना के बाद ट्रेन करीब दो घंटे तक मौके पर खड़ी रही। सूचना मिलने पर रेलवे और वन विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की।

तराई केंद्रीय वन प्रभाग के एसडीओ अमित ग्वाती कोटि के अनुसार, दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे अधिकारियों के साथ ट्रेन की गति सीमित रखने और अन्य सुरक्षा उपायों को लेकर वार्ता की जाएगी। वहीं, हादसे में हाथी का टूटा हुआ दांत लोको पायलट ने छतरपुर रेलवे स्टेशन मास्टर को सौंप दिया। वन विभाग की ओर से पोस्टमार्टम और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।



लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने जंगलों से गुजरने वाले हाईवे और रेलवे मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों की जरूरत को उजागर किया है। सड़क पर हाथियों की मौजूदगी जहां वाहन चालकों और राहगीरों के लिए खतरा बन रही है, वहीं रेल हादसों में वन्यजीवों की मौत भी गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे में हाथियों के आवागमन वाले संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, चेतावनी संकेतक लगाने और ट्रेनों की गति नियंत्रित करने जैसे उपायों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।


