सतीकुंड सौंदर्यीकरण की लागत पर सियासत तेज, सपा नेता ने उठाए 60-65 करोड़ रुपये खर्च पर सवाल

सतीकुंड सौंदर्यीकरण की लागत पर सियासत तेज, सपा नेता ने उठाए 60-65 करोड़ रुपये खर्च पर सवाल

स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

कनखल स्थित ऐतिहासिक सतीकुंड के सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। परियोजना की लागत को लेकर पहले भी कई सामाजिक संस्थाओं की ओर से सवाल उठाए जा चुके हैं। अब समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष लव कुमार दत्ता ने इस परियोजना को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए निर्माण लागत और कार्य की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।

सपा नेता लव कुमार दत्ता का दावा है कि सतीकुंड के सौंदर्यीकरण का कार्य महज 6 से 7 करोड़ रुपये में पूरा किया जा सकता था, लेकिन इस परियोजना पर 60 से 65 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने इस भारी अंतर को लेकर सवाल उठाते हुए परियोजना की लागत का विवरण सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।

लव कुमार दत्ता ने आरोप लगाया कि सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि परियोजना की वास्तविक लागत और प्रस्तावित खर्च के बीच अंतर को स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि आम जनता को भी यह जानकारी मिल सके कि निर्माण कार्य पर इतनी बड़ी धनराशि क्यों खर्च की जा रही है।

सपा नेता ने परियोजना की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी भी सार्वजनिक निर्माण कार्य में लागत, कार्य की गुणवत्ता और खर्च का विवरण स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से परियोजना के बजट और निर्माण से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने स्थानीय ठेकेदारों को कार्य नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाया। लव कुमार दत्ता ने सवाल किया कि सौंदर्यीकरण का काम स्थानीय ठेकेदारों को देने के बजाय बाहरी व्यक्तियों को सौंपना कहां तक उचित है। उनके इस बयान के बाद परियोजना के कार्य आवंटन और ठेके से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

गौरतलब है कि कनखल स्थित सतीकुंड धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। ऐसे में इसके सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों की रुचि बनी हुई है। परियोजना की लागत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच निर्माण कार्य से संबंधित तथ्यों और आधिकारिक जानकारी की अहमियत बढ़ गई है।

हालांकि, सपा नेता की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। परियोजना की कुल लागत, निर्धारित कार्यों और ठेका आवंटन की प्रक्रिया को लेकर संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में इन आरोपों को फिलहाल सपा नेता के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि सतीकुंड सौंदर्यीकरण परियोजना को लेकर उठाए गए सवालों पर संबंधित विभाग और राज्य सरकार की ओर से क्या जवाब दिया जाता है। आधिकारिक स्पष्टीकरण और परियोजना से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही लागत, निर्माण कार्य और ठेका आवंटन को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।