
स्थान : खटीमा (ऊधम सिंह नगर)
रिपोर्टर : अशोक सरकार

ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा क्षेत्र में स्थित हल्दीघेरा गौशाला में गोवंश में लंपी वायरस के लक्षण सामने आने से चिंता बढ़ गई है। कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस गौशाला का शुभारंभ किया था। गौशाला में पशुओं के रखरखाव और उपचार की व्यवस्था की गई है, लेकिन अब गोवंश में बीमारी के लक्षण दिखाई देने के बाद पशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

हल्दीघेरा स्थित गौशाला में करीब दो हजार पशुओं के रखरखाव की व्यवस्था होने की बात कही गई थी। हालांकि, वर्तमान में लगभग 680 पशुओं के रहने के बाद ही गौशाला की क्षमता पूरी होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में गौशाला की वास्तविक क्षमता और व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।




वहीं दूसरी ओर खटीमा के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमते दिखाई दे रहे हैं। इसके चलते सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। स्थानीय स्तर पर निराश्रित पशुओं के संरक्षण और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की आवश्यकता भी सामने आ रही है।


गौशाला में पशुओं की देखरेख कर रहे पवन नेगी ने बताया कि यहां मौजूद गोवंश के लिए चारे और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि पशुओं के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा रहा है। बीमार और चोटिल पशुओं का पशु चिकित्सकों की सहायता से उपचार कराया जा रहा है, ताकि उन्हें समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिल सके।



इस बीच गौशाला में कुछ गोवंश में लंपी वायरस जैसे लक्षण दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। पशु चिकित्सक डॉ. धर्मेंद्र पाल ने बताया कि गायों में इस बीमारी के लक्षण नजर आए हैं। लंपी स्किन डिजीज से प्रभावित पशुओं के शरीर पर गांठें या फोड़े, तेज बुखार और सुस्ती जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि संक्रमण की पुष्टि के लिए आवश्यक पशु चिकित्सा परीक्षण महत्वपूर्ण है।

पशु चिकित्सक डॉ. धर्मेंद्र पाल ने बताया कि इससे पहले खटीमा की शिव कॉलोनी में भी लंपी के लक्षणों से प्रभावित एक गाय का उपचार किया गया था। गाय को आवश्यक दवाइयां दी गई थीं और उसके शरीर पर हल्दी एवं तेल का लेप भी लगाया गया था। चिकित्सकों की देखरेख में बीमार पशुओं का उपचार किया जा रहा है।




डॉ. धर्मेंद्र पाल ने पशुपालकों से अपील की है कि यदि किसी गाय के शरीर पर गांठें, बुखार या सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि संक्रमित या संदिग्ध पशु को अन्य पशुओं से अलग रखना जरूरी है, ताकि बीमारी के फैलने का खतरा कम किया जा सके। पशुपालकों को बिना चिकित्सकीय सलाह के उपचार करने से भी बचना चाहिए।

गौशाला में बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच और निगरानी की आवश्यकता बढ़ गई है। विशेष रूप से एक ही परिसर में बड़ी संख्या में गोवंश रखे जाने के कारण बीमार पशुओं की समय पर पहचान और उन्हें अलग रखने की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही साफ-सफाई, पर्याप्त चारा और चिकित्सा सुविधाओं को बनाए रखना भी आवश्यक है।
फिलहाल हल्दीघेरा गौशाला में पशुओं के उपचार और देखरेख पर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं गौशाला की क्षमता और खटीमा क्षेत्र में घूम रहे निराश्रित गोवंश की समस्या भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग बीमारी की रोकथाम, पशुओं के संरक्षण और गौशाला की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

