
स्थान : रुड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के हरिद्वार आगमन से पहले नारसन बॉर्डर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता फूल-मालाओं के साथ मौजूद रहे और पार्टी के पक्ष में नारे लगाए।

कुमारी शैलजा दिल्ली से हरिद्वार में आयोजित कांग्रेस की जनसभा में शामिल होने जा रही थीं। इसी दौरान नारसन बॉर्डर पर उनका स्वागत किया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी तैयारियों और राजनीतिक दावों को भी सामने रखा।



मीडिया से बातचीत में कुमारी शैलजा ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के जारी विरोध का मुद्दा उठाया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल हाल के दिनों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। 6 अक्टूबर को दिल्ली में राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

कुमारी शैलजा ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में अपनी लड़ाई जारी रखेगी। चुनाव आयोग और भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का बचाव किया है।



पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल पर कुमारी शैलजा ने कोई टिप्पणी नहीं की। हाल के दिनों में हरीश रावत की यात्रा को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर मतभेद सामने आए हैं और पार्टी नेतृत्व की आपत्ति भी सार्वजनिक हुई है।
मंगलौर की राजनीति को लेकर कुमारी शैलजा ने दावा किया कि आगामी चुनाव में कांग्रेस मजबूत स्थिति में रहेगी। उन्होंने वर्तमान विधायक काजी निजामुद्दीन के समर्थन में भी अपनी बात रखी और कहा कि पार्टी उत्तराखंड में व्यापक बदलाव के एजेंडे के साथ आगे बढ़ेगी।




मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने भी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रदेश में सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ संगठनात्मक तैयारियां कर रही है। निर्वाचन आयोग के मुद्दे पर भी उन्होंने पार्टी नेतृत्व के रुख का समर्थन किया।
नारसन बॉर्डर पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम ने हरिद्वार जिले में कांग्रेस की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को एक बार फिर सामने ला दिया। एक ओर पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन आयोग के मुद्दे और संगठन के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल भी चर्चा के केंद्र में बनी हुई है।

