मसूरी शरदोत्सव की पहली स्टार नाइट में लोक संस्कृति और आधुनिक संगीत का संगम

मसूरी शरदोत्सव की पहली स्टार नाइट में लोक संस्कृति और आधुनिक संगीत का संगम

स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्ट

नगर पालिका परिषद मसूरी की ओर से आयोजित शरदोत्सव-2026 की पहली सांस्कृतिक शाम उत्तराखंड की लोक संस्कृति, जागर परंपरा और आधुनिक संगीत के शानदार संगम की साक्षी बनी। टाउन हॉल में आयोजित स्टार नाइट में पद्मश्री लोकगायिका बसंती बिष्ट और पांडवाज बैंड ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा।

कार्यक्रम की शुरुआत पद्मश्री बसंती बिष्ट और उनकी टीम की पारंपरिक जागर प्रस्तुति से हुई। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण, सेम नागराज, आंछरी सहित विभिन्न देवी-देवताओं से जुड़े जागरों की प्रस्तुति देकर उत्तराखंड की प्राचीन लोकपरंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया।

बसंती बिष्ट की सशक्त आवाज और पारंपरिक लोकधुनों ने पूरे माहौल को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। उनकी प्रस्तुति में पहाड़ की आस्था, लोकविश्वास और देवपरंपरा की गहरी झलक देखने को मिली। दर्शक लंबे समय तक मंत्रमुग्ध होकर प्रस्तुति सुनते रहे।

उन्होंने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि उत्तराखंड के जागर केवल गीत-संगीत नहीं, बल्कि पहाड़ की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। उनकी प्रस्तुति के दौरान टाउन हॉल तालियों और लोकधुनों से गूंजता रहा।

इसके बाद पांडवाज बैंड ने मंच संभाला। बैंड ने उत्तराखंड की पारंपरिक लोकधुनों और पहाड़ी जीवन से जुड़े गीतों को आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुत किया। लोकसंगीत और आधुनिक वाद्ययंत्रों के मेल ने युवाओं, स्थानीय लोगों और पर्यटकों को खासा आकर्षित किया।

पांडवाज की प्रस्तुतियों में उत्तराखंड की लोकपरंपरा, देवी-देवताओं, पहाड़ के जीवन और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। कलाकारों के तालमेल, ऊर्जा और संगीत की प्रस्तुति पर दर्शक देर रात तक झूमते नजर आए।

शरदोत्सव की पहली सांस्कृतिक शाम की खासियत यह रही कि एक ही मंच पर पारंपरिक जागर संस्कृति और आधुनिक अंदाज में पहाड़ी संगीत का संगम देखने को मिला। बसंती बिष्ट ने जहां दर्शकों को पहाड़ की जड़ों और आस्था से जोड़ा, वहीं पांडवाज ने उसी लोकधरोहर को आधुनिक संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया।

कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी पहुंचे। बसंती बिष्ट के जागरों के दौरान जहां माहौल श्रद्धा से भर गया, वहीं पांडवाज की प्रस्तुति में युवाओं का उत्साह चरम पर रहा। पहली स्टार नाइट ने मसूरी की सांस्कृतिक शाम को यादगार बना दिया।