
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों और उपक्रमों में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। कर्मचारियों ने देहरादून के परेड मैदान के पास सड़क किनारे फुटपाथ पर धरना देकर सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखीं।

आंदोलनरत कर्मचारियों की प्रमुख मांग समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ दिए जाने की है। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से विभिन्न सरकारी विभागों में आउटसोर्स माध्यम से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें समान कार्य के अनुरूप वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।


कर्मचारियों का कहना है कि जिस तरह उपनल कर्मचारियों को समान कार्य-समान वेतन सहित विभिन्न लाभ दिए गए हैं, उसी तर्ज पर आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं का भी समाधान किया जाना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने आउटसोर्स व्यवस्था में लागू ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने की मांग भी उठाई। उनका आरोप है कि ठेकेदारी व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा, वेतन और अन्य सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।



धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष रखा जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
आंदोलनकारियों का दावा है कि प्रदेशभर में करीब 35 से 40 हजार कर्मचारी आउटसोर्स व्यवस्था के तहत विभिन्न विभागों और सरकारी संस्थानों में कार्यरत हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर प्रदेशव्यापी एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया जाएगा।




कर्मचारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मियों के कार्य बहिष्कार पर जाने से विभिन्न सरकारी विभागों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से आंदोलन तेज होने से पहले उनकी मांगों पर वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की।
आउटसोर्स कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक फैसला नहीं करती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। कर्मचारियों ने सरकार से समान कार्य-समान वेतन और ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मांग पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है।

