
स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने हाल ही में छत्तीसगढ़ का दौरा किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज के आमंत्रण पर वह वहां पहुंचे थे, जहां मदरसा शिक्षा, अल्पसंख्यक समाज और समान नागरिक संहिता समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ में दोनों वक्फ बोर्ड अध्यक्षों की संयुक्त प्रेस वार्ता भी आयोजित की गई थी।

शादाब शम्स ने बताया कि दौरे का प्रमुख उद्देश्य उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी से जुड़े अनुभव साझा करना और इसे लेकर लोगों के बीच मौजूद आशंकाओं व गलतफहमियों पर चर्चा करना था। उत्तराखंड में यूसीसी 27 जनवरी 2025 से लागू है।


शम्स ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में यूसीसी लागू किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस व्यवस्था से जुड़े अनुभव अन्य राज्यों के साथ भी साझा किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों समेत विभिन्न नागरिक मामलों के लिए यूसीसी के तहत अलग-अलग सेवाएं संचालित हैं।


उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में भी समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर विचार किया जा रहा है। साथ ही मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और अल्पसंख्यक शिक्षा से संबंधित नई व्यवस्था को लेकर भी वहां चर्चा हुई। हालांकि इन प्रस्तावों के अंतिम स्वरूप को संबंधित राज्य सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट माना जाएगा।


शादाब शम्स ने कहा कि उत्तराखंड में भी मदरसा शिक्षा में बदलाव के माध्यम से बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। उनका कहना है कि उद्देश्य बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसरों तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे अल्पसंख्यक समाज के बच्चे धार्मिक अध्ययन के साथ विज्ञान, तकनीक और अन्य आधुनिक विषयों में भी आगे बढ़ सकें तथा डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशों में अपना भविष्य बना सकें।



शम्स ने छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज के साथ हुई चर्चा को सकारात्मक बताते हुए कहा कि दोनों राज्यों के अनुभवों और योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में अल्पसंख्यक समाज की शिक्षा और कौशल विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर जनता के बीच सही जानकारी पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी को लेकर व्यापक स्तर पर चर्चा चल रही है और उत्तराखंड का अनुभव इसमें संदर्भ के रूप में सामने आ रहा है।

