
स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में युवा स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में हल्द्वानी की बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा नंदिनी ने स्थानीय संसाधनों और हिमालयी जड़ी-बूटियों को आधार बनाकर ‘Himalayan Twacha’ नाम से अपना उद्यम शुरू किया है।

नंदिनी अपने उद्यम के माध्यम से प्राकृतिक और हस्तनिर्मित साबुन तैयार कर रही हैं। उनके प्रमुख उत्पादों में बुरांश, सी-बकथॉर्न, केसुड़ा, नीम, एलोवेरा, मिक्स फ्रूट और गोट मिल्क साबुन शामिल हैं।


इन साबुनों को कैस्टर ऑयल, नारियल तेल, शीया बटर और कोकोआ बटर जैसे प्राकृतिक घटकों के साथ सैपोनिफिकेशन प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। नंदिनी का प्रयास है कि प्राकृतिक सामग्री को आधुनिक उत्पाद के रूप में ग्राहकों तक पहुंचाया जाए।


‘Himalayan Twacha’ की एक खास पहचान इसकी पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग भी है। उत्पादों को प्लांट लीव्स में पैक कर जूट की रस्सी से बांधा जाता है, जिससे पारंपरिक स्वरूप और आधुनिक प्रस्तुति का आकर्षक मेल देखने को मिलता है।



नंदिनी का कहना है कि हिमालय उनके लिए केवल बाजार नहीं, बल्कि उनकी जड़ों और पारंपरिक ज्ञान का हिस्सा है। वह स्थानीय जड़ी-बूटियों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उद्यमिता से जोड़कर उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत को नए बाजार तक पहुंचाना चाहती हैं।
नंदिनी के अनुसार उन्हें सरस मेले समेत विभिन्न आयोजनों में अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए मंच मिला है। इन मेलों के माध्यम से उनके उत्पाद नए ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं और व्यवसाय को आगे बढ़ाने के अवसर भी बढ़ रहे हैं।




नंदिनी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों और युवा उद्यमियों को मंच मिलने से स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। ऐसे आयोजनों से छोटे उद्यमों को पहचान और बाजार दोनों मिलते हैं।
‘Himalayan Twacha’ की यह पहल स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और युवा उद्यमिता के समन्वय का उदाहरण है। नंदिनी की कोशिश यह दिखाती है कि पहाड़ के प्राकृतिक संसाधनों को नवाचार के साथ जोड़कर स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

