नैनीताल की बदहाल सड़कों पर मंत्री राम सिंह कैड़ा सख्त, PWD को तत्काल डामरीकरण के निर्देश

नैनीताल की बदहाल सड़कों पर मंत्री राम सिंह कैड़ा सख्त, PWD को तत्काल डामरीकरण के निर्देश

स्थान : नैनीताल
ब्यूरो रिपोर्ट

जनपद की क्षतिग्रस्त सड़कों और डामरीकरण कार्य में हो रही देरी को लेकर मंत्री राम सिंह कैड़ा ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के सामने नाराजगी जताई है। उन्होंने PWD के उच्च अधिकारियों से फोन पर बात कर जिले के क्षतिग्रस्त मोटर मार्गों पर तत्काल डामरीकरण शुरू करने के निर्देश दिए।

मंत्री कैड़ा ने अधिकारियों से कहा कि जब विभिन्न सड़कों के डामरीकरण के लिए आवश्यक धनराशि पहले ही स्वीकृत हो चुकी है, तो धरातल पर काम शुरू होने में देरी क्यों हो रही है। इससे पहले भी उन्होंने अधिकारियों को बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद सड़क सुधार कार्य तेजी से शुरू करने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने कहा कि खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण स्थानीय लोगों के साथ ही वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बजट स्वीकृत होने के बाद कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

मंत्री ने चाफी-पदमपुर धारी, रानीबाग-भीमताल, धारी-कसियालेख, टकूरा-जमराड़ी और रामगढ़-कैंचीधाम सहित जिले के कई मोटर मार्गों पर स्वीकृत धनराशि का उपयोग करते हुए समयबद्ध तरीके से डामरीकरण कराने के निर्देश दिए।

रामगढ़ से कैंचीधाम की ओर जाने वाले मोटर मार्ग पर भी डामरीकरण कार्य के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में रामगढ़-कैंचीधाम मार्ग पर करीब 5.28 करोड़ रुपये की लागत से डामरीकरण कार्य शुरू किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

मंत्री कैड़ा ने PWD अधिकारियों को सबसे अधिक क्षतिग्रस्त सड़कों को प्राथमिकता में लेकर काम शुरू कराने के निर्देश दिए। साथ ही कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा और रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया है।

उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट किया कि डामरीकरण कार्य में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए और स्वीकृत कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं। लापरवाही या अनावश्यक देरी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात भी कही गई।

नैनीताल जिले में बारिश के दौरान कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं, जिसके बाद सड़क सुधार और डामरीकरण की मांग लगातार उठ रही थी। अब मंत्री के निर्देश के बाद लोक निर्माण विभाग पर स्वीकृत कार्यों को तेजी से धरातल पर उतारने का दबाव बढ़ गया है।