आजादी का दौर देखा, अब भी खुद निपटाते हैं जरूरी काम; युवाओं को देते हैं नशे से दूर रहने और अनुशासन की सीख

आजादी का दौर देखा, अब भी खुद निपटाते हैं जरूरी काम; युवाओं को देते हैं नशे से दूर रहने और अनुशासन की सीख

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर माजरी ग्रांट निवासी 113 वर्षीय ठाकर दास का जीवन बुजुर्गों की सक्रियता और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करता है। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बावजूद वह अपने अधिकांश दैनिक कार्य स्वयं करने का प्रयास करते हैं और नियमित रूप से सक्रिय रहते हैं।

ठाकर दास खेती से जुड़े कार्यों की निगरानी भी स्वयं करते हैं। बैंक संबंधी जरूरी काम हो या अन्य व्यक्तिगत जिम्मेदारी, वह जहां तक संभव हो खुद ही पूरा करने जाते हैं। उनकी सक्रिय दिनचर्या और आत्मनिर्भर जीवनशैली देखकर आसपास के लोग भी प्रभावित होते हैं।

ठाकर दास उस पीढ़ी से आते हैं जिसने अंग्रेजी शासन और वर्ष 1947 में देश की आजादी का दौर देखा। समय के साथ देश और समाज में आए बड़े बदलावों के साक्षी रहे ठाकर दास वर्तमान में अपनी चौथी पीढ़ी के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

लंबे जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए ठाकर दास नई पीढ़ी को देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि युवाओं को मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ते हुए देश के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

युवाओं से बातचीत के दौरान वह विशेष रूप से नशे से दूर रहने पर जोर देते हैं। ठाकर दास बताते हैं कि उन्होंने स्वयं जीवनभर नशे से दूरी बनाए रखी और अनुशासित जीवनशैली को अपनाया। वह युवाओं को भी स्वस्थ और सकारात्मक जीवन जीने की सीख देते हैं।

उनका कहना है कि मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच जीवन में आगे बढ़ने के महत्वपूर्ण आधार हैं। कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और अपने लक्ष्य के प्रति लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

ठाकर दास मतदान के अधिकार के प्रति भी लोगों को जागरूक रहने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ ही समाज के सक्षम लोगों को जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस के अवसर पर ठाकर दास का जीवन यह संदेश देता है कि बढ़ती उम्र सक्रियता और सामाजिक जिम्मेदारी में बाधा नहीं बननी चाहिए। बुजुर्गों के अनुभवों का सम्मान करने के साथ नई पीढ़ी उनके जीवन से अनुशासन, मेहनत, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी की सीख ले सकती है।