कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ने मतगणना, परिसीमन, नामांकन निरस्तीकरण और छात्र नेताओं पर कार्रवाई को लेकर लगाए आरोप

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ने मतगणना, परिसीमन, नामांकन निरस्तीकरण और छात्र नेताओं पर कार्रवाई को लेकर लगाए आरोप

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव एवं मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने प्रेस वार्ता कर प्रदेश में विभिन्न स्तरों पर हुई चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पंचायत, नगर निकाय, सहकारिता और छात्रसंघ चुनावों में प्रशासनिक हस्तक्षेप और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए।

काजी निजामुद्दीन ने नारसन ब्लॉक की ग्राम पंचायत नाथूखेड़ी के प्रधान पद के चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि एक प्रत्याशी के पक्ष में परिणाम आने के बाद कई बार मतगणना कराई गई और आठवीं गणना में परिणाम बदल गया। उन्होंने सवाल किया कि एक ही चुनाव में इतनी बार मतगणना की आवश्यकता क्यों पड़ी।

उन्होंने नगर निकाय चुनाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूर्व पालिका अध्यक्ष चौधरी इस्लाम का नामांकन नजूल भूमि पर कब्जे की शिकायत के आधार पर निरस्त किया गया। निजामुद्दीन ने दावा किया कि इस मामले में पूर्व में न तो मुकदमा दर्ज था और न ही पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिया गया, इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सहकारिता चुनावों को लेकर भी उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया पर प्रश्न खड़े किए। उनका आरोप था कि पहले परिसीमन अधिसूचित किया गया और बाद में उसमें बदलाव कर नए परिसीमन के आधार पर चुनाव कराया गया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान बार-बार होने वाले ऐसे बदलाव पारदर्शिता को लेकर सवाल पैदा करते हैं।

कांग्रेस नेता ने छात्रसंघ चुनावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के दौरान छात्र नेता विनीत भट्ट की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी छात्र नेता के खिलाफ कोई आपराधिक मामला था तो कार्रवाई चुनाव के समय ही क्यों की गई।

निजामुद्दीन ने कहा कि कांग्रेस किसी व्यक्ति के आपराधिक कृत्य का बचाव नहीं करती, लेकिन चुनाव के समय की जाने वाली कार्रवाई का चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने चुनाव प्रबंधन में निष्पक्षता और समान अवसर बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाताओं को अपनी पसंद के प्रत्याशी को चुनने का अधिकार है और चुनावी संस्थाओं की जिम्मेदारी निष्पक्ष तथा पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अलग-अलग चुनावों को लेकर प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

काजी निजामुद्दीन ने कहा कि कांग्रेस मतदाता अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि मताधिकार में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को लेकर पार्टी जनता के बीच जाएगी और प्रत्येक मतदाता के अधिकार की सुरक्षा की मांग करती रहेगी।