लोहाघाट में आशा कार्यकर्ताओं का कार्य बहिष्कार, 24 हजार मानदेय और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

लोहाघाट में आशा कार्यकर्ताओं का कार्य बहिष्कार, 24 हजार मानदेय और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

स्थान : लोहाघाट (चंपावत)
ब्यूरो रिपोर्ट

मानदेय बढ़ाने और सरकारी कर्मचारी घोषित करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। 29 सितंबर को चंपावत आशा कार्यकर्ता संगठन की जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं ने लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में कार्य बहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा ने कहा कि आशा कार्यकर्ता लंबे समय से 24 हजार रुपये मासिक मानदेय और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मांगों को लेकर कई बार आंदोलन किए जा चुके हैं, लेकिन संगठन के अनुसार अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। स्थानीय रिपोर्टों में भी आशा कार्यकर्ताओं द्वारा मानदेय और कर्मचारी दर्जे की मांग उठाए जाने का उल्लेख है।

उन्होंने कहा कि चंपावत जिले की आशा कार्यकर्ता एक सितंबर से प्रत्येक मंगलवार कार्य बहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन कर रही हैं। 29 सितंबर को आंदोलन का लगातार पांचवां मंगलवार रहा। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

संगठन के अनुसार अक्टूबर से पूर्ण कार्य बहिष्कार की तैयारी की जा रही है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि 24 अक्टूबर को जिला मुख्यालय में विशाल रैली निकालने और जिलाधिकारी कार्यालय में धरना देने की योजना है। उन्होंने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और सरकार को मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा।

सरस्वती पुनेठा ने कहा कि आशा कार्यकर्ता बेहद कठिन परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्य करती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में उन्हें लंबी दूरी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच काम करना पड़ता है, इसके बावजूद मानदेय और सेवा संबंधी समस्याएं बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की सबसे प्रमुख मांग सम्मानजनक मानदेय की है। संगठन का दावा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से वर्ष 2021 में मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उनकी मांग के अनुरूप अब तक बढ़ोतरी नहीं हुई है।

धरना-प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें दोहराईं। प्रदर्शनकारियों ने “24 हजार से कम नहीं” और “मानदेय देना होगा” जैसे नारे लगाए तथा मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।

आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो वे आंदोलन को और तेज करेंगी। संगठन की ओर से 2027 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि यह संगठन की घोषित चेतावनी है और आगे की रणनीति परिस्थितियों व सरकारी प्रतिक्रिया के आधार पर तय होने की बात कही गई है।