पितृ पक्ष में बदरीनाथ धाम पहुंचे श्रद्धालु, ब्रह्मकपाल में पिंडदान और तर्पण

पितृ पक्ष में बदरीनाथ धाम पहुंचे श्रद्धालु, ब्रह्मकपाल में पिंडदान और तर्पण

स्थान : बद्रीनाथ
ब्यूरो रिपोर्ट

पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही भू-बैकुंठ नगरी श्री बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के लिए धाम पहुंच रहे हैं।

श्रद्धालु सबसे पहले भगवान श्री बदरी विशाल के दर्शन कर रहे हैं। इसके बाद तीर्थ पुरोहितों के मार्गदर्शन में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित ब्रह्मकपाल तीर्थ में पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।

पिछले दो दिनों से बदरीपुरी में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ब्रह्मकपाल क्षेत्र में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है और तीर्थ पुरोहित विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण करा रहे हैं।

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल में पिंडदान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां पितरों के निमित्त किए गए कर्मकांड से दिवंगत आत्माओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शास्त्रीय और पौराणिक परंपराओं में बद्रीनाथ धाम को भू-बैकुंठ कहा गया है। इसी कारण पितृ पक्ष के दौरान यहां श्राद्ध कर्म के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मान्यता यह भी है कि ब्रह्मकपाल में एक बार पिंडदान करने के बाद अन्य स्थानों पर दोबारा पिंडदान करने की आवश्यकता नहीं रहती। इसी आस्था के कारण ब्रह्मकपाल का महत्व गया और काशी जैसे प्रमुख मोक्ष स्थलों के संदर्भ में भी विशेष रूप से बताया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव से जुड़ी ब्रह्महत्या दोष मुक्ति की कथा भी ब्रह्मकपाल से जुड़ी मानी जाती है। कहा जाता है कि इसी स्थल पर भगवान शिव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली थी।

पितृ पक्ष के दौरान बद्रीनाथ धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से स्थानीय बाजार और धार्मिक गतिविधियों में भी चहल-पहल बढ़ी है। तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों के बीच भी इस अवधि को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

आने वाले दिनों में पितृ पक्ष के चलते ब्रह्मकपाल में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। धार्मिक आस्था के साथ बद्रीनाथ पहुंच रहे श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में तर्पण और पिंडदान कर पुण्य लाभ की कामना कर रहे हैं।