सीएम हेल्पलाइन की हकीकत जानने सड़क पर उतरे डीएम, शिकायतकर्ता को मौके से किया फोन

सीएम हेल्पलाइन की हकीकत जानने सड़क पर उतरे डीएम, शिकायतकर्ता को मौके से किया फोन

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने चकराता रोड, शिमला बाईपास और जीएमएस रोड का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय दावों और मौके की स्थिति का मिलान किया।

शिमला बाईपास मार्ग की बदहाली से जुड़ी एक शिकायत को विभागीय स्तर पर ‘संतुष्ट’ दिखाकर फोर्स क्लोज किए जाने का मामला निरीक्षण के दौरान सामने आया। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए मौके से ही शिकायतकर्ता को फोन कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली।

डीएम ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद ग्राउंड ट्रुथिंग और शिकायतों के वास्तविक निस्तारण की जांच के लिए यह स्पॉट इंस्पेक्शन किया गया है। उनका कहना था कि शिकायत केवल कागजों में निस्तारित दिखाना पर्याप्त नहीं है।

निरीक्षण के दौरान पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से भी वार्ता की गई। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को सड़क की स्थिति, लंबित कार्य और आगामी मरम्मत योजना की जानकारी दी।

डीएम डॉ. आशीष चौहान के अनुसार मौसम ठीक होते ही संबंधित स्थानों पर सड़क सुधार का काम शुरू कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से 15 अक्टूबर तक कार्य पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि कुछ स्थानों पर बिना निर्धारित औपचारिक प्रक्रिया के काम होने की जानकारी मिली है। इस पर एडीबी को शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने संबंधित एजेंसियों को कार्य की गति बढ़ाने और गुणवत्ता के साथ समय सीमा में काम पूरा करने को कहा। डीएम ने स्पष्ट किया कि निर्माण और सड़क खुदाई से जुड़े कार्यों में समन्वय और अनुमति की प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

बिना अनुमति खुदाई, कार्य में लापरवाही या शिकायतों के गलत निस्तारण पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। अधिकारियों से कहा गया है कि हेल्पलाइन की शिकायतों का समाधान केवल रिकॉर्ड में नहीं, बल्कि मौके पर भी दिखाई देना चाहिए।

डीएम के इस निरीक्षण को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतों के वास्तविक निस्तारण की निगरानी से जोड़कर देखा जा रहा है। अब प्रशासन का जोर शिकायतों की ग्राउंड ट्रुथिंग, समयबद्ध कार्रवाई और विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करने पर है।