
स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

आगामी विधानसभा चुनाव में हरिद्वार क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा जताने के एक दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत शुक्रवार को हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने हरकी पैड़ी पर मां गंगा का विधि-विधान से पूजन किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इससे पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से हरिद्वार से एक बार फिर प्रतिनिधित्व करने की इच्छा जाहिर की थी।

पत्रकारों से बातचीत में रावत ने हरिद्वार से अपने पुराने राजनीतिक और भावनात्मक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके मन में इच्छा है कि वह एक बार फिर हरिद्वार का प्रतिनिधित्व करें और यहां की जनता की सेवा करें। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि चुनाव लड़ने को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।



हरीश रावत ने भावुक अंदाज में अपनी व्यक्तिगत आकांक्षा भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि जीवन के अंतिम समय में उनकी अंतिम यात्रा हरिद्वार के प्रतिनिधि के रूप में निकले। उनके इस बयान को हरिद्वार के साथ उनके लंबे राजनीतिक और व्यक्तिगत जुड़ाव की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के व्यवहार और शिष्टाचार की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत शिष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री धामी की अपनी विशेषता है।



इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर तीखे सवाल उठाए। कांग्रेस ने हाल में मतदाता सूची और चुनाव संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किया था, जिसमें हरीश रावत शामिल हुए थे।
रावत ने चुनाव आयुक्त को लेकर बर्खास्तगी और महाभियोग की मांग दोहराई। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप और मांग है; चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है, इसकी पुष्टि अलग से आवश्यक होगी।




हरीश रावत के हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा जताने के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि हरिद्वार के लिए उनके मन में कई योजनाएं हैं और वह क्षेत्र को विधानसभा में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना चाहते हैं।
हालांकि प्रत्याशी चयन कांग्रेस नेतृत्व की प्रक्रिया के तहत ही होगा। रावत पहले भी कह चुके हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव में पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, वह उसी के अनुरूप कार्य करेंगे।
हरिद्वार दौरे के दौरान गंगा पूजन और उनके राजनीतिक बयानों ने आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी चर्चाओं को नया विषय दे दिया है। अब आगे पार्टी स्तर पर उनकी संभावित उम्मीदवारी को लेकर क्या फैसला होता है, इस पर नजर रहेगी।

