छात्रसंघ चुनाव में तीन नामांकन निरस्त, कॉलेज प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया की होल्ड

छात्रसंघ चुनाव में तीन नामांकन निरस्त, कॉलेज प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया की होल्ड

स्थान : मसूरी
ब्यूरो रिपोर्ट

कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में शुक्रवार को नामांकन पत्रों की जांच के बाद विवाद खड़ा हो गया। एबीवीपी के उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष पद के तीन प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त किए जाने के बाद एनएसयूआई समेत विभिन्न छात्र संगठनों ने कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की।

विवाद बढ़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल छात्रसंघ चुनाव प्रक्रिया को होल्ड कर दिया है। पूरे मामले की जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति को भेजी गई है। अब विश्वविद्यालय से मिलने वाले दिशा-निर्देशों के बाद ही चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

कॉलेज प्रशासन के मुताबिक सभी नामांकन पत्रों की जांच निर्धारित चुनाव नियमों के तहत की गई। जांच के दौरान एबीवीपी के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी की आयु निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई, जिसके चलते उनका नामांकन निरस्त किया गया।

वहीं सचिव और कोषाध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के नामांकन पत्रों में दस्तावेजों तथा क्रेडिट बेस्ड सिस्टम से संबंधित आपत्तियां सामने आईं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इन्हीं आपत्तियों के आधार पर दोनों नामांकन निरस्त किए गए हैं।

तीन नामांकन निरस्त होने के बाद एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कॉलेज गेट पर प्रदर्शन किया। संगठन के छात्र नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया। हालांकि कॉलेज प्रशासन की ओर से इन आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।

प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों और निर्धारित नियमों के अनुसार निष्पक्ष तरीके से कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नियमों से अलग जाकर किसी नामांकन को मंजूरी दी जाती है तो इसका विरोध किया जाएगा।

विवाद के बीच मसूरी छात्र संगठन और जौनपुर छात्र संगठन के पदाधिकारी भी सामने आए। छात्र नेताओं का कहना था कि छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसमें सभी प्रत्याशियों पर समान रूप से नियम लागू होने चाहिए।

नामांकन के बाद अध्यक्ष पद पर फिलहाल एनएसयूआई के विकास सिंह, एबीवीपी के विद्यांत थापली और मसूरी छात्र संगठन के मनन शाही के बीच मुकाबले की तस्वीर सामने आई है। हालांकि विश्वविद्यालय के फैसले और अंतिम प्रत्याशी सूची जारी होने के बाद ही चुनावी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

प्राचार्य डॉ. सुनील पवार ने बताया कि नामांकन पत्रों की जांच नियमानुसार की गई है। विवाद की स्थिति को देखते हुए पूरे मामले से विश्वविद्यालय के कुलपति को अवगत करा दिया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर को मतदान और उसी दिन मतगणना प्रस्तावित थी, लेकिन अब चुनाव की अगली प्रक्रिया विश्वविद्यालय के निर्देश के बाद ही तय होगी।