त्यूनी में भूमि अभिलेखों को लेकर भड़का आक्रोश, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

त्यूनी में भूमि अभिलेखों को लेकर भड़का आक्रोश, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

जौनसार-बावर क्षेत्र में भूमि के राजस्व अभिलेखों में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सोमवार को रुद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग त्यूनी तहसील कार्यालय पहुंचे और नारेबाजी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन को पुराने राजस्व अभिलेख भी सौंपे।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वर्ष 1983-84 की बंदोबस्त प्रक्रिया के दौरान भूमि अभिलेखों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई। संगठन का दावा है कि स्थानीय अनुसूचित जाति एवं जनजातीय परिवारों की पैतृक भूमि के साथ ही बंजर और अन्य श्रेणी की जमीनों की प्रविष्टियों में बदलाव कर उन्हें दूसरे लोगों के नाम दर्ज किया गया।

रुद्रसेना के संस्थापक राकेश तोमर उत्तराखंडी ने कहा कि प्रारंभिक तौर पर करीब 600 से 700 बीघा भूमि से संबंधित शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में पुराने अभिलेखों में पूर्वजों के नाम दर्ज होने के बावजूद बाद के राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव दिखाई दे रहा है। संगठन ने पुराने और वर्तमान खाता नंबरों का मिलान कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने वर्ष 1951-52 के मूल बंदोबस्त अभिलेखों और वर्ष 1983-84 के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि दोनों दस्तावेजों की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि जांच के दौरान खसरा, खतौनी, दाखिल-खारिज और अन्य संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर यह स्पष्ट किया जाए कि भूमि का वास्तविक हकदार कौन है।

रुद्रसेना ने दावा किया कि जौनसार-बावर जनजातीय क्षेत्र होने के कारण भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों में विशेष कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। संगठन ने वर्ष 1967 के सरकारी गजट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बाहरी लोगों के नाम कथित रूप से की गई प्रविष्टियों की वैधानिकता की जांच जरूरी है। इस दावे पर अंतिम स्थिति राजस्व और विधिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जांच में यदि कोई नामांतरण अथवा राजस्व प्रविष्टि नियमों के विरुद्ध पाई जाती है तो उसे निरस्त कर वास्तविक हकदारों के अधिकार बहाल किए जाएं। ग्रामीणों ने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों अथवा अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच कर कार्रवाई की मांग की।

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह मामला पहले भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिलाधिकारी देहरादून के समक्ष उठाया जा चुका है। पिछले दिनों एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर वर्ष 1983-84 के बंदोबस्त और पुराने राजस्व अभिलेखों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग रखी थी।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते मामले की जांच कर अभिलेखों में कथित गड़बड़ियों को दूर नहीं किया तो आंदोलन को व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के पैतृक भूमि अधिकार और जनजातीय क्षेत्र में राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा विषय है।

वहीं उपजिलाधिकारी त्यूणी प्रेमलाल ने कहा कि किसानों और ग्रामीणों की ओर से दी गई शिकायतों में उल्लेखित जमीनों की विधिक जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई भूमि गलत तरीके से दर्ज पाई जाती है तो नियमानुसार संबंधित प्रविष्टि को निरस्त करने सहित आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।