

स्थान : विकासनगर
ब्यूरो रिपोर्ट


उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों और राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में पछुवादून क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल हुई है। लगभग 26 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद विकासनगर तहसील परिसर में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीद स्मारक के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। गुरुवार को क्षेत्रीय विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत हवन-पूजन के साथ स्मारक निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।


उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीद स्मारक का निर्माण मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के माध्यम से लगभग दो करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से कराया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत शहीदों की स्मृतियों को संरक्षित करने के साथ राज्य आंदोलन के इतिहास को भी सहेजा जाएगा। स्मारक परिसर में एक भव्य संग्रहालय का निर्माण प्रस्तावित है, जहां उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए हुए जनसंघर्ष की महत्वपूर्ण घटनाओं और आंदोलनकारियों के योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा।





शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण किसी एक व्यक्ति या एक दिन के प्रयासों का परिणाम नहीं है। इसके पीछे हजारों आंदोलनकारियों का लंबा संघर्ष, मातृशक्ति का त्याग और अमर शहीदों का सर्वोच्च बलिदान जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के आंदोलन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण रहा है और उनके संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता।



विधायक चौहान ने कहा कि प्रस्तावित शहीद स्मारक केवल पत्थरों और भवनों का ढांचा नहीं होगा, बल्कि इसे एक तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। यह स्थान आने वाली पीढ़ियों को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्षपूर्ण इतिहास और शहीदों की गौरवगाथा से परिचित कराएगा। उन्होंने कहा कि स्मारक युवाओं में अपनी संस्कृति, इतिहास और राज्य के प्रति समर्पण की भावना जागृत करने का माध्यम बनेगा।


परियोजना के अंतर्गत बनने वाले संग्रहालय में उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज, आंदोलनकारियों के छायाचित्र, शहीदों के स्मृति चिह्न और आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रतीकों को संरक्षित किया जाएगा। इसके अलावा राज्य निर्माण आंदोलन की प्रमुख घटनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले लोग अलग उत्तराखंड राज्य की मांग से लेकर राज्य गठन तक के संघर्ष को समझ सकें।

स्मारक की एक विशेष बात यह भी होगी कि इसमें राज्य आंदोलन के दौरान पत्रकारों और कलमकारों की भूमिका को भी स्थान दिया जाएगा। पृथक राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाने और आंदोलनकारियों की आवाज को बुलंद करने वाले पत्रकारों के योगदान को संग्रहालय में सहेजने की योजना है। इससे राज्य आंदोलन के उन महत्वपूर्ण पहलुओं को भी पहचान मिलेगी, जिन्होंने जनभावनाओं को व्यापक स्तर पर सामने लाने में अहम भूमिका निभाई थी।



विकासनगर में शहीद स्मारक निर्माण की मांग पिछले करीब 26 वर्षों से उठाई जा रही थी। पछुवादून गढ़वाल सभा इस मांग को लेकर लगातार प्रयासरत थी। सभा के पदाधिकारियों और राज्य आंदोलनकारियों ने लंबे समय तक स्मारक निर्माण की आवाज उठाई। अब परियोजना के शिलान्यास के साथ उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। इससे क्षेत्र के आंदोलनकारियों और स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है।


कार्यक्रम में मौजूद राज्य आंदोलनकारियों और स्थानीय लोगों ने स्मारक निर्माण की शुरुआत का स्वागत करते हुए इसे पछुवादून क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले शहीदों और आंदोलनकारियों की स्मृतियों को संरक्षित करना बेहद जरूरी है। स्मारक बनने से विकासनगर को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहचान मिलेगी और नई पीढ़ी को राज्य आंदोलन के इतिहास से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।

शिलान्यास कार्यक्रम में पछुवादून गढ़वाल सभा के अध्यक्ष रोशन नेगी, सचिव लक्ष्मी प्रसाद कोठियाल, आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, वरिष्ठ आंदोलनकारी उर्मिला शर्मा, केशव उनियाल, पुष्कर बहुगुणा, कैप्टन महेंद्र सिंह नेगी, माधवानंद रतूड़ी, सुरेशानंद बेलवाल, जयंती पटवाल, पूर्व विधायक कुलदीप कुमार, ब्लॉक प्रमुख नारायण ठाकुर, पूर्व ब्लॉक प्रमुख जसविंदर सिंह बिट्टू, चंदन सिंह सजवाण, सुमन मोहन ममगाईं, संतोष रावत, हेमचंद सकलानी, राजेश नौटियाल, अजय जुयाल, अनूप रावत, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष नीरज अग्रवाल, उपजिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय गुप्ता और विकासनगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय गुप्ता सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

