धान खरीद को लेकर जसपुर में भाकियू और पूर्व विधायक आमने-सामने, आरएफसी कार्यालय में तीखी नोकझोंक

धान खरीद को लेकर जसपुर में भाकियू और पूर्व विधायक आमने-सामने, आरएफसी कार्यालय में तीखी नोकझोंक

स्थान : जसपुर
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में धान खरीद और तौल व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानियां लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच जसपुर में धान खरीद से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के पदाधिकारियों और भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल के बीच तीखी कहासुनी हो गई। मामला आरएफसी कार्यालय में उस समय हुआ, जब भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता किसानों और राइस मिलरों से जुड़ी शिकायतों को लेकर अधिकारियों के समक्ष वार्ता की तैयारी कर रहे थे। दोनों पक्षों के बीच बढ़ती बहस के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।

धान खरीद में देरी से परेशान किसान

प्रदेश में धान की फसल की खरीद और तौल को लेकर किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि मंडियों में अपनी उपज बेचने के लिए उन्हें कई तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। धान खरीद एक अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन खरीद प्रक्रिया नौ अक्टूबर से शुरू होने की बात सामने आई। इसके बाद भी व्यवस्था को लेकर किसानों की शिकायतें जारी हैं। किसानों की इन समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन लगातार आवाज उठा रही है।

किसानों और राइस मिलरों की शिकायतों के निस्तारण को पहुंचे थे भाकियू पदाधिकारी

जानकारी के अनुसार, भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता कुछ किसानों और कच्चे आढ़ती कहे जाने वाले राइस मिलरों से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण के लिए आरएफसी कार्यालय पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि संगठन के पदाधिकारी शिकायतकर्ता किसानों के साथ कार्यालय में मौजूद थे और संबंधित राइस मिलरों को बुलाकर तौल प्रभारी के सामने वार्ता कराने की तैयारी की जा रही थी। उद्देश्य धान खरीद और तौल से जुड़ी समस्याओं पर बातचीत कर समाधान निकालना था।

पूर्व विधायक के पहुंचने पर बढ़ी बहस

इसी दौरान भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल अपने समर्थकों के साथ आरएफसी कार्यालय पहुंच गए। वहां भाकियू प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता के साथ बातचीत के दौरान किसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तकरार शुरू हो गई। देखते ही देखते बातचीत के स्वर तेज हो गए और दोनों ओर से तीखी नोकझोंक होने लगी। घटना की जानकारी फैलते ही तहसील परिसर में लोगों की भीड़ जमा हो गई।

मौके पर मौजूद लोगों ने कराया मामला शांत

आरएफसी कार्यालय में बढ़ते विवाद को देखते हुए मौके पर मौजूद लोगों ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। लोगों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई। घटना के बाद जसपुर में इस विवाद को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। हालांकि, बहस की वास्तविक वजह और दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद के पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने के लिए संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।

धान खरीद व्यवस्था और किसानों की समस्याएं फिर चर्चा में

इस घटनाक्रम के बाद धान खरीद और तौल व्यवस्था से जुड़ी किसानों की समस्याएं एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। किसानों को अपनी उपज की तौल, खरीद और भुगतान से संबंधित परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए व्यवस्था को सुचारू बनाना जरूरी है। भाकियू की ओर से किसानों की शिकायतों के निस्तारण के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं आरएफसी कार्यालय में हुई नोकझोंक ने इस मुद्दे को स्थानीय स्तर पर और चर्चा में ला दिया है।

दोनों पक्षों के बयान का इंतजार

इस पूरे मामले में भाकियू प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता और पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद विवाद की वजह और घटनाक्रम की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, आरएफसी कार्यालय में हुई तीखी कहासुनी के बाद लोगों की नजर इस बात पर है कि किसानों की धान खरीद से जुड़ी शिकायतों का समाधान किस तरह किया जाता है और खरीद व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।