
स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों की खराब स्थिति एक बार फिर यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन गई। शनिवार सुबह बेरीनाग से टनकपुर जा रही टनकपुर डिपो की रोडवेज बस चंपावत के तिलोन क्षेत्र के पास तकनीकी खराबी के चलते बीच सड़क पर खड़ी हो गई। बस में सवार 16 यात्रियों को अचानक आई खराबी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने परिवहन निगम की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए पर्वतीय मार्गों पर नई और सुरक्षित बसों के संचालन की मांग की।

जानकारी के अनुसार उत्तराखंड परिवहन निगम के टनकपुर डिपो की बस संख्या यूके 07 पीए 3121 शनिवार सुबह बेरीनाग से टनकपुर की ओर जा रही थी। सुबह करीब 11 बजे चंपावत के तिलोन के पास बस का अल्टरनेटर जाम हो गया, जिसके कारण बस बीच रास्ते में ही बंद हो गई। चालक ने बस को दोबारा चालू करने का प्रयास किया, लेकिन तकनीकी खराबी दूर नहीं हो सकी।




बस चालक महेश राम ने बताया कि अल्टरनेटर जाम होने के कारण बस में तकनीकी समस्या आ गई थी। उन्होंने मौके पर ही खराबी को ठीक करने के कई प्रयास किए, लेकिन बस आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद उन्होंने बस खराब होने की सूचना टनकपुर डिपो के संबंधित अधिकारियों को दी।


बीच सफर में बस खराब होने से उसमें सवार सभी 16 यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। यात्रियों में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भी शामिल थे। अचानक बस बंद होने के कारण यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने की चिंता सताने लगी। कई यात्रियों ने परिवहन निगम की बसों की तकनीकी स्थिति और रखरखाव पर सवाल उठाए।


यात्रियों ने आरोप लगाया कि टनकपुर से बेरीनाग मार्ग पर परिवहन निगम द्वारा पुरानी और खराब हालत वाली बसों का संचालन किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस मार्ग पर चलने वाली बसों में आए दिन तकनीकी खराबियां सामने आती रहती हैं। यात्रियों ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में इस प्रकार बसों का खराब होना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।

नाराज यात्रियों ने सरकार और उत्तराखंड परिवहन निगम पर यात्रियों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी मार्गों पर बसों की तकनीकी जांच और नियमित रखरखाव बेहद जरूरी है। यात्रियों ने मांग की कि परिवहन निगम पर्वतीय मार्गों पर बेहतर स्थिति वाली बसें उपलब्ध कराए, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा मिल सके।



वहीं बस चालक महेश राम ने बताया कि खराबी दूर नहीं होने के बाद सभी 16 यात्रियों को दूसरी बसों के माध्यम से उनके गंतव्य की ओर रवाना कर दिया गया। उन्होंने कहा कि बस में आई तकनीकी खराबी की सूचना डिपो के अधिकारियों को दे दी गई है। खराब बस को ठीक कराने के लिए आगे की कार्रवाई संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने परिवहन निगम की बसों की कमी को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एक ओर सरकार टनकपुर में करोड़ों रुपये की लागत से अंतरराज्यीय बस अड्डे का निर्माण करा रही है, वहीं दूसरी ओर परिवहन निगम के डिपो बसों की कमी से जूझ रहे हैं। लोगों ने कहा कि केवल बस अड्डों का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि यात्रियों के लिए सुरक्षित और बेहतर बसों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
लोगों ने आरोप लगाया कि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए नई बसों की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि बसों की कमी और तकनीकी खराबियों के कारण परिवहन निगम की सेवाओं पर यात्रियों का भरोसा प्रभावित हो रहा है। यात्रियों ने सरकार से पुरानी बसों की तकनीकी जांच कराने और पर्वतीय मार्गों पर नई बसें उपलब्ध कराने की मांग की है।

