
स्थान : चमोली
रिपोर्टर : विनोद पांडे

हिमालय की गोद में 15 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब और पौराणिक लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शनिवार को धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। सेना के बैंड की मधुर धुनों, शबद-कीर्तन और अंतिम अरदास के बीच इस वर्ष की यात्रा का समापन हुआ। कपाट बंद होने के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से धाम का वातावरण भक्तिमय बना रहा।

हेमकुंड साहिब की यात्रा इस वर्ष 23 मई से प्रारंभ हुई थी। गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार इस यात्रा सीजन में 3 लाख 84 हजार 573 से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम पहुंचकर मत्था टेका। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए। कपाट बंद होने के अवसर पर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।




कपाट बंद होने के धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए गोविंद धाम यानी घांघरिया से रागी जत्थे के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंचे। इस दौरान पाकिस्तान से आए 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं के जत्थे ने भी पवित्र धाम में मत्था टेका। बर्फ से ढकी सप्तश्रृंग पर्वत श्रृंखलाओं के बीच श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।


शनिवार सुबह सुखमनी साहिब के पाठ के साथ कपाट बंद होने की धार्मिक प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद गुरुद्वारा परिसर में शबद-कीर्तन का आयोजन किया गया। रागी जत्थों ने गुरुवाणी का गायन कर श्रद्धालुओं को निहाल किया। दोपहर में यात्रा की अंतिम अरदास संपन्न हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने सभी की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।



अंतिम अरदास के बाद हुक्मनामा लिया गया और पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को पंज प्यारों की अगुवाई में सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच दीवान हॉल से सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया। इस दौरान श्रद्धालु भावुक नजर आए। धार्मिक परंपराओं के अनुसार सभी अनुष्ठान संपन्न होने के बाद हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।

इस वर्ष हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को मौसम की कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। यात्रा मार्ग पर भारी बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और फिसलन भरे रास्तों के कारण यात्रियों की आवाजाही कई बार कठिन हो गई। इसके बावजूद चमोली पुलिस और एसडीआरएफ के जवान श्रद्धालुओं की सहायता के लिए लगातार तैनात रहे। दुर्गम रास्तों पर जवानों ने जरूरतमंद यात्रियों को सहारा देकर सुरक्षित आगे बढ़ने में मदद की।




पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार के नेतृत्व और दिशा-निर्देशन में यात्रा के दौरान सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्थाओं की निगरानी की गई। पुलिसकर्मियों ने कठिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की सहायता करने के साथ ही सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयास किए। विशेष रूप से बर्फबारी के दौरान यात्रियों को फिसलन भरे मार्गों से सुरक्षित निकालने में पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्रजीत सिंह बिन्द्रा और वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने यात्रा के दौरान चमोली पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा प्रबंधन की सराहना की। उन्होंने प्रभारी निरीक्षक गोविंदघाट चित्रगुप्त सिंह और चौकी प्रभारी घांघरिया अमनदीप सिंह के प्रयासों की विशेष रूप से प्रशंसा करते हुए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के मैनेजर मोनू सिंह, ग्रंथी हामिद सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

यात्रा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भी चमोली पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों के सहयोग, सेवाभाव और तत्परता की सराहना की। बर्फीले रास्तों और दुर्गम परिस्थितियों में जवानों की सहायता श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। अंतिम अरदास और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस वर्ष की हेमकुंड साहिब यात्रा संपन्न हो गई। अब अगले यात्रा सीजन में कपाट खुलने पर श्रद्धालु पुनः पवित्र धाम के दर्शन कर सकेंगे।

