
स्थान : बागेश्वर
ब्यूरो रिपोर्ट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एकदिवसीय बागेश्वर दौरे के दौरान जनपद के वरिष्ठ नागरिक संगठन ने विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर उन्हें मांग पत्र सौंपा। संगठन के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह खेतवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर बागेश्वर-टनकपुर रेल मार्ग निर्माण, ट्रांसपोर्ट सब्सिडी, जंगली जानवरों के आतंक और बंद पड़े उद्योगों को दोबारा शुरू करने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं।

वरिष्ठ नागरिक संगठन के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह खेतवाल ने मुख्यमंत्री के समक्ष जनपद की परिवहन संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि बागेश्वर लंबे समय से रेल संपर्क की सुविधा से वंचित है। ऐसे में जिले के लोगों को आवागमन और माल ढुलाई के लिए सड़क परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे परिवहन का खर्च बढ़ जाता है।




संगठन ने मांग की कि जब तक बागेश्वर-टनकपुर रेल मार्ग का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक पूरे बागेश्वर जनपद को 50 प्रतिशत ट्रांसपोर्ट सब्सिडी का लाभ दिया जाए। दिलीप सिंह खेतवाल ने कहा कि इस व्यवस्था से व्यापारियों, उद्यमियों और स्थानीय लोगों को राहत मिल सकती है। साथ ही परिवहन लागत कम होने से जिले की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने जिले में बंदरों और जंगली सूअरों के आतंक का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने उठाया। संगठन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवर किसानों की फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की मेहनत और उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।



दिलीप सिंह खेतवाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में खेती पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में बंदरों और जंगली सूअरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने से किसानों की परेशानियां और बढ़ रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से किसानों को राहत दिलाने और वन्यजीवों से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था करने की मांग की।
वरिष्ठ नागरिक संगठन ने जिले में रोजगार के घटते अवसरों को लेकर भी चिंता जताई। जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि पिछले लगभग दो वर्षों से खनन उद्योग और अल्मोड़ा मैग्नेसाइट फैक्ट्री बंद होने के कारण बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर कम होने से युवाओं और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।




संगठन ने मुख्यमंत्री को बताया कि उद्योगों से जुड़े कई युवाओं और कारोबारियों ने बैंकों से ऋण लिया हुआ है। रोजगार और कारोबार प्रभावित होने के कारण उन्हें ऋण की किस्तें चुकाने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने मांग की कि बंद पड़े उद्योगों को नियमानुसार दोबारा संचालित करने के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाए, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल ने जिले में भांग की अवैध खेती के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और युवाओं पर दर्ज मामलों का मुद्दा भी उठाया। दिलीप सिंह खेतवाल ने इस विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़ी समस्याओं पर विचार करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में रोजगार के वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास होने चाहिए।

मुख्यमंत्री को सौंपे गए मांग पत्र में संगठन ने रेल परियोजना, परिवहन सब्सिडी, किसानों की समस्याओं और औद्योगिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने की मांगों को प्राथमिकता दी। संगठन ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इन समस्याओं का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करेगी। विशेष रूप से रोजगार के अवसर बढ़ाने और पर्वतीय जनपद की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता बताई गई।

