वीरभद्र महादेव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ अनुष्ठान, साधकों को दिए गए महादेवन और कृष्णा नाम

वीरभद्र महादेव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ अनुष्ठान, साधकों को दिए गए महादेवन और कृष्णा नाम

स्थान : ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट

तीर्थनगरी ऋषिकेश में सनातन परंपरा से जुड़ा एक विशेष धार्मिक आयोजन हुआ, जिसमें जापान से आए दो साधकों का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पट्टाभिषेक कर उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई। कार्यक्रम प्रसिद्ध वीरभद्र महादेव मंदिर में आयोजित किया गया।

आयोजन में भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रविंद्र पुरी, निरंजन पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर आचार्य कैलाशानंद गिरी महाराज और महंत दर्शन भारती मौजूद रहे। उनके सान्निध्य में पारंपरिक विधि-विधान के साथ पट्टाभिषेक की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।

पट्टाभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों और संस्कृत श्लोकों का उच्चारण किया गया। जापान से आए दर्जनों साधक भी इस धार्मिक अनुष्ठान के साक्षी बने और पूरी श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।

अनुष्ठान के बाद दोनों जापानी साधकों को नए आध्यात्मिक नाम भी प्रदान किए गए। उन्हें महादेवन और कृष्णा नाम दिया गया, जिसके बाद संत समाज की ओर से उनका स्वागत और अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान सनातन धर्म, भारतीय अध्यात्म और वैदिक परंपराओं के वैश्विक प्रसार को लेकर भी चर्चा हुई। संतों ने कहा कि विदेशों से आने वाले साधकों की भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में बढ़ती रुचि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का संकेत है।

महामंडलेश्वर आचार्य कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की परंपराएं पूरी दुनिया में पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि वैदिक ज्ञान, संस्कृत और आध्यात्मिक साधना का संदेश अब भारत की सीमाओं से बाहर भी व्यापक रूप से फैल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे अलग-अलग देशों के साधकों को सनातन संस्कृति को नजदीक से समझने का अवसर मिलता है।

वीरभद्र महादेव मंदिर में हुए इस पट्टाभिषेक समारोह के दौरान धार्मिक माहौल बना रहा। संतों और साधकों ने कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति, सद्भाव और सनातन मूल्यों के प्रसार की कामना की।