बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग पर उमड़ा जनसैलाब, 5 अक्टूबर से आमरण अनशन की चेतावनी

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग पर उमड़ा जनसैलाब, 5 अक्टूबर से आमरण अनशन की चेतावनी

स्थान : लालकुआं
ब्यूरो रिपोर्ट

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर रविवार को एक बार फिर बड़ा आंदोलन देखने को मिला। वनाधिकार संगठन के आह्वान पर हजारों ग्रामीण जड़ सेक्टर स्थित जनता इंटर कॉलेज से रैली के रूप में लालकुआं पहुंचे और तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन कर सरकार से जल्द अधिसूचना जारी करने की मांग की।

संगठन के अनुसार सुबह करीब नौ बजे से ही ग्रामीण जड़ सेक्टर में जुटने लगे थे। बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और स्थानीय लोगों की भागीदारी के कारण लालकुआं बाजार और आसपास के मार्गों पर भारी भीड़ दिखाई दी। आयोजकों ने रैली में करीब 15 हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया है।

रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना तत्काल जारी करने के साथ गौला नदी के किनारे स्थायी तटबंध निर्माण की मांग भी उठाई। तहसील परिसर में आयोजित धरने में आंदोलनकारियों ने कहा कि लंबे समय से आश्वासन मिलने के बावजूद राजस्व ग्राम की प्रक्रिया अंतिम स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।

वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट के अनुसार बिंदुखत्ता के 32 गांवों के 11,703 दावेदारों की ओर से वनाधिकार कानून-2006 के तहत प्रस्तुत सामुदायिक दावे को 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने सर्वसम्मति से स्वीकृत कर शासन को भेज दिया था। इसके बावजूद राजस्व ग्राम की अधिसूचना अब तक जारी नहीं होने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।

संगठन ने बताया कि राजस्व ग्राम की मांग को लेकर 15 अगस्त से गांव-गांव पदयात्रा और जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। रविवार की रैली को इसी आंदोलन की अगली कड़ी बताया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अधिसूचना जारी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

धरना स्थल पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा भी पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से बातचीत की और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से प्रतिनिधिमंडल की फोन पर बात कराई जाने की जानकारी दी। कैड़ा के मुताबिक सरकार बिंदुखत्ता के मामले का समाधान बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए निकालने की दिशा में प्रयास कर रही है।

मंत्री कैड़ा ने आंदोलनकारियों से कहा कि बिंदुखत्ता में कई पीढ़ियों से लोग रह रहे हैं और इस समस्या का दीर्घकालीन समाधान जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को कैबिनेट स्तर पर विचार के लिए रखे जाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लिया जा सके। यह सरकार और मंत्री की ओर से दिया गया आश्वासन है; अंतिम निर्णय अधिसूचना या कैबिनेट कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

वनाधिकार संगठन ने सरकार को 5 अक्टूबर तक का समय दिया है। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस तारीख तक राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी नहीं की गई, तो 5 अक्टूबर से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। संगठन ने कहा कि उस स्थिति में आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग कई वर्षों से चली आ रही है और पूर्व में भी शासन स्तर पर ज्ञापन तथा प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। अब हजारों ग्रामीणों की इस रैली और 5 अक्टूबर के अल्टीमेटम के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राज्य सरकार के सामने प्रमुखता से आ गया है।