लो-फ्रीक्वेंसी ने बढ़ाई बिजली आपूर्ति की मुश्किलें, उत्तराखंड में आकस्मिक रोस्टिंग

लो-फ्रीक्वेंसी ने बढ़ाई बिजली आपूर्ति की मुश्किलें, उत्तराखंड में आकस्मिक रोस्टिंग

स्थान : रूड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में पिछले दो-तीन दिनों से लो-फ्रीक्वेंसी की समस्या ने विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रिड पर दबाव बढ़ने के कारण ग्रामीण, शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार आकस्मिक रोस्टिंग यानी बिजली कटौती करनी पड़ रही है।

अचानक बिजली गुल होने से आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, बार-बार होने वाली बिजली कटौती का असर व्यापारिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

विद्युत विभाग के अधिकारियों के अनुसार लो-फ्रीक्वेंसी की स्थिति में ग्रिड की सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिकता है। ऐसी स्थिति में विद्युत व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में आकस्मिक रोस्टिंग की जा रही है।

अधीक्षण अभियंता विनोद पांडे ने बताया कि लो-फ्रीक्वेंसी के कारण ग्रिड को सुरक्षित रखने के लिए बिजली कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि स्थिति के अनुसार ही रोस्टिंग की जा रही है, ताकि पूरी विद्युत व्यवस्था पर अधिक दबाव न पड़े।

विभाग का कहना है कि बिजली कटौती का उद्देश्य उपभोक्ताओं को परेशान करना नहीं, बल्कि ग्रिड को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखना है। यदि ग्रिड पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है तो विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

अधिकारियों ने दावा किया है कि अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में आकस्मिक बिजली कटौती अपेक्षाकृत कम की जा रही है। इसके बावजूद लो-फ्रीक्वेंसी के कारण कुछ क्षेत्रों में अचानक आपूर्ति बाधित हो रही है।

विद्युत विभाग ने उपभोक्ताओं से भी सहयोग की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि गैर-जरूरी विद्युत उपकरणों का उपयोग न करें और जरूरत न होने पर लाइट, पंखे, एसी तथा अन्य उपकरण बंद रखें।

विभाग का कहना है कि बिजली की अनावश्यक खपत कम होने से ग्रिड पर दबाव घटाने में मदद मिलेगी। ग्रिड की सुरक्षा के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन विद्युत व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने में उपभोक्ताओं का सहयोग भी महत्वपूर्ण है।