
स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री एवं आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज का 75वां जन्मदिन हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में धूमधाम से मनाया गया। मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय समारोह के दूसरे दिन सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए।

समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पहुंचे। दोनों ने सतपाल महाराज को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।



राज्यपाल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सतपाल महाराज का जीवन अध्यात्म, सेवा और राष्ट्रसेवा का संगम है। उन्होंने कहा कि मानव उत्थान सेवा समिति के माध्यम से सतपाल महाराज ने देश-विदेश में मानव धर्म, आत्मज्ञान, प्रेम और सद्भाव का संदेश पहुंचाने का कार्य किया है।

राज्यपाल ने कहा कि आध्यात्मिक गुरुओं का मार्गदर्शन समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने समारोह में शामिल होकर प्रसन्नता व्यक्त की और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में सामूहिक संकल्प और राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी पर जोर दिया।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सतपाल महाराज को 75वें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में बड़ी संख्या में लोगों को आध्यात्मिक और सामाजिक मार्गदर्शन दिया है। मुख्यमंत्री ने उनके व्यक्तित्व में सादगी, सहजता और अनुशासन का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सतपाल महाराज मंत्रिमंडल के सदस्य के रूप में भी राज्य की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए कहा कि उनका अनुभव और मार्गदर्शन समाज के लिए उपयोगी है।



दो दिवसीय जन्मोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में सतपाल महाराज के अनुयायी और श्रद्धालु पहुंचे। ऋषिकुल मैदान में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धालुओं ने सतपाल महाराज को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।

सतपाल महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मानव सेवा, आपसी सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और चरित्र निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचार और आत्मज्ञान जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समारोह में विभिन्न जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग भी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच दो दिवसीय आयोजन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण में संपन्न हुआ।

