सफाई ठेके पर उठे गंभीर सवाल, आरटीआई खुलासे के बाद भी टेंडर निरस्त नहीं होने पर घिरा मंडी परिषद

सफाई ठेके पर उठे गंभीर सवाल, आरटीआई खुलासे के बाद भी टेंडर निरस्त नहीं होने पर घिरा मंडी परिषद

स्थान : हल्द्वानी
रिपोर्टर : पंकज सक्सेना

उत्तराखंड मंडी परिषद में विभिन्न मंडियों की सफाई व्यवस्था से जुड़े ठेके को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता अमित कुमार ने आरोप लगाया है कि सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों में सफाई ठेके से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आने के बावजूद अब तक संबंधित ठेके को निरस्त नहीं किया गया है। उन्होंने मंडी परिषद के अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।

अमित कुमार के मुताबिक आरटीआई से मिली सूचना में सामने आया था कि प्रदेश की 26 मंडियों में सफाई व्यवस्था का ठेका एक ऐसे ठेकेदार को दिया गया, जो भाजपा ओबीसी मोर्चा से जुड़ा जिला पदाधिकारी बताया जा रहा है। उनका आरोप है कि राजनीतिक जुड़ाव के कारण मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि ठेकेदार अथवा संबंधित राजनीतिक संगठन की ओर से इन आरोपों पर पक्ष सामने आना बाकी है।

आरटीआई कार्यकर्ता का दावा है कि ठेके के अनुबंध में स्पष्ट शर्त थी कि सफाई कार्य में लगाए गए सभी पर्यावरण मित्रों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में आरटीजीएस अथवा निर्धारित बैंकिंग माध्यम से दिया जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों का भविष्य निधि यानी पीएफ नियमानुसार जमा करने की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की थी। अमित कुमार का आरोप है कि इन शर्तों के अनुपालन से संबंधित दस्तावेज मांगने के बावजूद उन्हें पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पर्यावरण मित्रों को बैंक खाते के माध्यम से भुगतान किया गया है तो उनके वेतन भुगतान की आरटीजीएस रिपोर्ट क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी तरह कर्मचारियों के पीएफ जमा होने से संबंधित रसीदें और रिकॉर्ड भी सूचना के अधिकार के तहत मांगे जाने के बावजूद कथित तौर पर उपलब्ध नहीं कराए गए। अमित कुमार ने इसे कर्मचारियों के हितों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए जांच की मांग की है।

आरटीआई कार्यकर्ता ने सफाई व्यवस्था के लिए अनुबंध में निर्धारित संसाधनों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि ठेके की शर्तों के अनुसार मंडियों में सफाई कार्य के लिए आवश्यक मशीनरी और संसाधनों की व्यवस्था की जानी थी, लेकिन कई स्थानों पर निर्धारित व्यवस्था जमीन पर दिखाई नहीं दी। उन्होंने मांग की है कि अधिकारी प्रत्येक मंडी में तैनात कर्मचारियों, मशीनरी और किए गए भुगतान का भौतिक सत्यापन कराएं।

अमित कुमार का दावा है कि अनुबंध में यह भी प्रावधान था कि यदि ठेकेदार द्वारा नियमों अथवा निर्धारित शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए टेंडर निरस्त किया जा सकता है। उनका कहना है कि कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आने और मामला मीडिया में उठने के बाद मंडी परिषद के अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक टेंडर निरस्तीकरण की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि यदि कर्मचारियों के वेतन, पीएफ और सफाई संसाधनों से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ी अथवा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन पाया गया है तो जांच पूरी कर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आरटीआई कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव के कारण मामले में कार्रवाई की गति धीमी है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों तथा ठेकेदार का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

अमित कुमार ने मंडी परिषद से मांग की है कि सभी 26 मंडियों में कार्यरत पर्यावरण मित्रों की सूची, उनके बैंक खातों में किए गए वेतन भुगतान का विवरण, पीएफ जमा करने का रिकॉर्ड, सफाई के लिए उपलब्ध कराई गई मशीनरी और ठेकेदार द्वारा अनुबंध की शर्तों के पालन से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। उनका कहना है कि ऐसा होने से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और कर्मचारियों के हित भी सुरक्षित रहेंगे।

अब निगाहें मंडी परिषद निदेशालय पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है। टेंडर निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू हुई है या नहीं, कथित अनियमितताओं की विभागीय जांच कराई गई है या नहीं और पर्यावरण मित्रों के वेतन व पीएफ का रिकॉर्ड सही पाया गया है या नहीं—इन सवालों पर परिषद की आधिकारिक स्थिति सामने आना अभी बाकी है। संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार का पक्ष मिलने पर ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।