सरकारी संपत्तियों को लीज पर देने के विरोध में अल्मोड़ा में कांग्रेस का धरना, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

सरकारी संपत्तियों को लीज पर देने के विरोध में अल्मोड़ा में कांग्रेस का धरना, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

स्थान : अल्मोड़ा
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड में सरकारी गेस्ट हाउस, निरीक्षण भवनों और सरकारी भूमि को लीज पर निजी हाथों में सौंपने संबंधी आदेश के विरोध में शुक्रवार को कांग्रेस ने अल्मोड़ा में धरना-प्रदर्शन किया। स्थानीय विधायक मनोज तिवारी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के फैसले पर सवाल उठाते हुए आदेश को तत्काल निरस्त करने और पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की।

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विधायक मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने करीब एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी संपत्तियों, गेस्ट हाउस और निरीक्षण भवनों को लीज पर देने का आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियां प्रदेश की जनता की धरोहर हैं और इन्हें निजी हाथों में सौंपने का निर्णय जनहित के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने और फैसले का आधार सार्वजनिक करने की मांग की।

विधायक तिवारी ने प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों को लीज पर देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है और इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। हालांकि कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कांग्रेस नेताओं ने अल्मोड़ा के लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन, कटारमल स्थित निरीक्षण भवन और अन्य सरकारी गेस्ट हाउस को निजी हाथों में सौंपे जाने की आशंका पर भी विरोध जताया। विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर इन सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में नहीं जाने देगी। उन्होंने कहा कि सरकारी भवनों और भूमि का उपयोग जनहित में होना चाहिए और इनकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल सहित कांग्रेस नेताओं ने भी सरकारी संपत्तियों को लीज पर देने की नीति का विरोध किया। कांग्रेस ने अल्मोड़ा के साथ रानीखेत स्थित चौबटिया उद्यान पार्क और अन्य निरीक्षण भवनों से जुड़े मामलों को भी अपने प्रदेशव्यापी विरोध अभियान में शामिल किया है। पार्टी ने चार नवंबर से ‘भूमि बचाओ, धामी हटाओ’ अभियान चलाने की घोषणा की थी, जिसके तहत अलग-अलग जिलों में वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। Uttarakhand Tak+1

धरना दे रहे कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि सरकारी भूमि और भवनों को लीज पर देने से संबंधित पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को संबंधित आदेश तत्काल निरस्त करना चाहिए। विधायक मनोज तिवारी ने इसे एक लाख करोड़ रुपये का कथित घपला बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। हालांकि इस राशि और भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकारी संपत्तियों का संरक्षण करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारी भूमि, गेस्ट हाउस और निरीक्षण भवनों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो पार्टी विरोध जारी रखेगी। धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्तियों से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संबंधित आदेश निरस्त करने की मांग दोहराई।