खटीमा में 100 किलो सोने का लालच देकर थारू जनजाति के परिवार से कथित ठगी, दो बीघा जमीन हड़पने का आरोप

खटीमा में 100 किलो सोने का लालच देकर थारू जनजाति के परिवार से कथित ठगी, दो बीघा जमीन हड़पने का आरोप

स्थान -खटीमा/ऊधम सिंह नगर
रिपोर्ट – अशोक सरकार

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा में 100 किलोग्राम सोना मिलने का झांसा देकर थारू जनजाति के एक परिवार से कथित धोखाधड़ी और जमीन हड़पने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था ने पुलिस क्षेत्राधिकारी खटीमा को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संस्था ने मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की अपील की है।

मामला खटीमा के ग्राम भूड़ महोलिया का है, जहां थारू जनजाति के उमेश सिंह राणा के साथ कथित तौर पर ठगी और धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार, पीड़ित को उसकी जमीन में भारी मात्रा में सोना दबा होने की बात कहकर विश्वास में लिया गया। इसके बाद पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर उसे लगातार भ्रमित किए जाने का आरोप है।

मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एडवोकेट रमेश सिंह राणा की ओर से दिए गए शिकायती पत्र में दावा किया गया है कि पीड़ित की जमीन में करीब 100 किलोग्राम सोना होने का झांसा दिया गया। आरोप है कि इस लालच में फंसाकर पीड़ित से धार्मिक क्रियाओं और पूजा-पाठ के नाम पर विभिन्न गतिविधियां कराई गईं। संस्था ने इस पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित धोखाधड़ी बताते हुए जांच की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पीड़ित को भ्रमित करने के बाद हाईवे से लगी उसकी करीब दो बीघा जमीन बेहद कम कीमत पर हस्तांतरित करा ली गई। इसके साथ ही करीब सवा करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और धनराशि हड़पने का आरोप भी लगाया गया है। संस्था का कहना है कि मामले में जमीन के हस्तांतरण और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

पीड़ित पक्ष के अनुसार, इस मामले में थाना खटीमा में मुकदमा पहले ही दर्ज किया जा चुका है। हालांकि, मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच उच्चाधिकारी स्तर से कराए जाने की मांग उठाई है। संस्था का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों को सामने लाया जाना चाहिए।

संस्था ने पुलिस के समक्ष आठ सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें भूमि अभिलेखों और रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच, बैंक खातों से हुए लेन-देन का सत्यापन, डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल और पूजा-पाठ के नाम पर कथित धोखाधड़ी में शामिल व्यक्तियों की भूमिका की जांच प्रमुख हैं। इसके अलावा मामले की विवेचना की उच्चाधिकारी स्तर पर समीक्षा कराने की भी मांग की गई है।

मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की है। संस्था का कहना है कि यदि जांच में धोखाधड़ी और अवैध तरीके से भूमि हस्तांतरण के आरोप सही पाए जाते हैं, तो पीड़ित की जमीन और कथित तौर पर हड़पी गई धनराशि को नियमानुसार वापस दिलाने के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही पूरे मामले की जांच निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने की मांग की गई है।

फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। संस्था की ओर से उठाई गई मांगों के बाद अब पुलिस की विवेचना और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। करीब 100 किलो सोने का लालच देकर जमीन और धनराशि हड़पने के इस कथित मामले में पुलिस जांच से ही साफ हो पाएगा कि घटनाक्रम में किन लोगों की क्या भूमिका रही है।