एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में बढ़ा चुनावी खर्च का मुद्दा, बड़े आयोजनों से गरमाया माहौल

एमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में बढ़ा चुनावी खर्च का मुद्दा, बड़े आयोजनों से गरमाया माहौल

स्थान : हल्द्वानी
ब्यूरो रिपोर्ट

एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव 2026 अब अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गया है। 29 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने छात्रों को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। चुनाव प्रचार के बीच बड़े आयोजनों और उन पर संभावित खर्च को लेकर कॉलेज परिसर में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

अध्यक्ष पद के तीनों प्रत्याशी अपनी-अपनी चुनावी रणनीति के साथ मैदान में हैं। समर्थकों की सक्रियता और छात्र-छात्राओं तक पहुंच बनाने के लिए लगातार कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसके चलते इस बार अध्यक्ष पद का मुकाबला पिछले चुनावों की तुलना में ज्यादा हाई-प्रोफाइल और चर्चा का विषय बना हुआ है।

हाल के दिनों में छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित फ्रेशर पार्टी जैसे कार्यक्रम भी खूब चर्चा में रहे। इन आयोजनों में संगीत, डांस और खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद अब मतदान से ठीक एक दिन पहले 28 सितंबर को भी अलग-अलग स्थानों पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात सामने आ रही है।

बताया जा रहा है कि इन कार्यक्रमों में ऑर्केस्ट्रा, कुमाऊंनी गायकों की प्रस्तुति, म्यूजिकल आफ्टरनून और डांडिया जैसे आयोजन शामिल हैं। खास बात यह है कि अलग-अलग प्रत्याशियों से जुड़े बताए जा रहे ये कार्यक्रम दोपहर करीब 12 बजे के आसपास आयोजित किए जाने की चर्चा है।

एक ही समय पर कई कार्यक्रम होने से छात्र-छात्राओं के बीच भी इस बात को लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि वे किस कार्यक्रम में शामिल हों। साथ ही यह भी चर्चा का विषय है कि मतदान से ठीक पहले हो रहे इन आयोजनों का छात्रों के मतदान व्यवहार पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

इस पूरे चुनावी माहौल के बीच सबसे बड़ा सवाल चुनावी खर्च और निर्धारित नियमों के पालन को लेकर उठ रहा है। छात्रसंघ चुनाव में प्रत्याशियों के प्रचार और खर्च को लेकर नियम तय होते हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि इन कार्यक्रमों का आयोजन किसके द्वारा किया जा रहा है और इन पर होने वाला खर्च किस खाते में जोड़ा जाएगा।

यदि ये आयोजन किसी प्रत्याशी या उसके चुनाव प्रचार से सीधे जुड़े हैं, तो कॉलेज प्रशासन के सामने खर्च का पूरा विवरण लेने की जिम्मेदारी होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव प्रचार छात्रसंघ चुनाव के लिए निर्धारित नियमों और आचार संहिता के तहत ही किया जा रहा हो।

एमबीपीजी कॉलेज में इससे पहले भी कई छात्रसंघ चुनाव हुए हैं, लेकिन इस बार जिस तरह बड़े आयोजनों और प्रचार गतिविधियों की चर्चा सामने आई है, उससे चुनावी खर्च एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। अध्यक्ष पद की लड़ाई अब समर्थन जुटाने के साथ-साथ प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में भी देखी जा रही है।

अब सभी की निगाहें 29 सितंबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। छात्र किस प्रत्याशी के पक्ष में फैसला देते हैं, यह मतगणना के बाद साफ होगा। हालांकि परिणाम के साथ यह सवाल भी बना रहेगा कि चुनाव प्रचार और आयोजनों पर हुए खर्च का पूरा हिसाब प्रशासन के सामने आता है या नहीं और किसी शिकायत की स्थिति में उसकी जांच किस तरह की जाती है।