
स्थान : चमोली
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड के चमोली जनपद में प्रसिद्ध रहस्यमय रूपकुंड ट्रेक मार्ग पर स्थित बगुवाबासा क्षेत्र इन दिनों ब्रह्मकमल के अद्भुत सौंदर्य से सराबोर है। समुद्र तल से लगभग 4,100 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह पथरीला पड़ाव एक बार फिर प्रकृति प्रेमियों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

बगुवाबासा क्षेत्र उत्तराखंड के राजकीय पुष्प ब्रह्मकमल के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। मानसून के मौसम में, खासकर जुलाई से सितंबर के बीच, यहां की दुर्गम पहाड़ियों, चट्टानों की दरारों और अल्पाइन घास के मैदानों में ब्रह्मकमल बड़े पैमाने पर खिलते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र अनुपम प्राकृतिक छटा से भर उठता है।



प्रकृति प्रेमी चन्दन नयाल ने बताया कि इस बार रूपकुंड ट्रेक के अहम पड़ाव बगुवाबासा में असंख्य ब्रह्मकमल खिले हुए हैं। उन्होंने कहा कि दूर-दूर तक फैली इन प्राकृतिक क्यारियों को देखकर वह अभिभूत हो उठे। उनके अनुसार इतनी बड़ी संख्या में ब्रह्मकमल का एक साथ खिलना प्रकृति का अद्भुत उपहार है।

उन्होंने बताया कि कैलू विनायक से बगुवाबासा तक के दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर इस बार ब्रह्मकमल की भरपूर बहार देखने को मिल रही है। पथरीले मार्गों और चट्टानों की दरारों के बीच खिले ये दुर्लभ पुष्प यात्रियों और प्रकृति प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।



ब्रह्मकमल, जिसका वैज्ञानिक नाम Saussurea obvallata है, उत्तराखंड का राजकीय पुष्प है और इसे अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। आमतौर पर यह फूल ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में ही खिलता है। ऐसे में बगुवाबासा में इसका सैकड़ों और कहीं-कहीं असंख्य संख्या में एक साथ खिलना पर्यावरणीय दृष्टि से भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
स्थानीय जानकारों के अनुसार यह क्षेत्र श्री नन्दा देवी बड़ी जात यात्रा से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए भी लंबे समय से विशेष आकर्षण का केंद्र रहा है। यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले इन ऊंचाई वाले इलाकों में खिले ब्रह्मकमल श्रद्धालुओं और यात्रियों को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का भी अनुभव कराते हैं।




बगुवाबासा के बुग्यालों और पथरीले मार्गों पर फैली ब्रह्मकमल की क्यारियां पूरी घाटी को अपनी सुगंध से महका रही हैं। ऊंचे हिमालयी वातावरण, ठंडी हवाओं और दुर्लभ पुष्पों की मौजूदगी से यहां का प्राकृतिक दृश्य और भी मनमोहक हो गया है।
प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि इस तरह बड़ी संख्या में ब्रह्मकमल का खिलना जैव विविधता और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए उत्साहजनक संकेत है। हालांकि इसके संरक्षण और संवेदनशील पर्वतीय पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सतर्कता भी उतनी ही आवश्यक है, ताकि यह प्राकृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।
रूपकुंड ट्रेक मार्ग का बगुवाबासा क्षेत्र इस समय प्रकृति के अनुपम रंगों से सजा हुआ है। दुर्लभ ब्रह्मकमल की खुशबू और सौंदर्य ने पूरी घाटी को जीवंत बना दिया है। यह नजारा न केवल प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष है, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध प्राकृतिक विरासत की एक अनूठी झलक भी प्रस्तुत करता है।

