बामणी गांव पहुंची भगवान कुबेर की उत्सव डोली, जयकारों से गूंजी घाटी

बामणी गांव पहुंची भगवान कुबेर की उत्सव डोली, जयकारों से गूंजी घाटी

स्थान : बद्रीनाथ
ब्यूरो रिपोर्ट

भगवान श्री बदरी विशाल की धार्मिक परंपराओं से जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा के तहत धन के देवता भगवान कुबेर की उत्सव डोली एक बार फिर बामणी गांव पहुंची। श्री बद्रीनाथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान कुबेर दोपहर के भोग के बाद उत्सव डोली के रूप में भक्तों को दर्शन देने के लिए बामणी गांव पहुंचे।

भगवान कुबेर को श्री बदरी विशाल की बद्रीश पंचायत में खजांची के रूप में पूजा जाता है। परंपरा के अनुसार विशेष अवसरों पर उनकी उत्सव डोली मंदिर से बाहर निकलकर बामणी गांव पहुंचती है, जहां ग्रामीण श्रद्धा और उल्लास के साथ भगवान के दर्शन करते हैं।

उत्सव डोली के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने जागरों, ढोल-दमाऊ और गाजे-बाजे के साथ भगवान कुबेर का भव्य स्वागत किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु डोली के दर्शन के लिए पहुंचे और पूरे गांव में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा।

इसके बाद भगवान कुबेर की उत्सव डोली नन्दा चौक पहुंची। यहां धार्मिक अनुष्ठानों के बीच देवी-देवताओं के अवतरण की परंपरा निभाई गई। श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं के दर्शन कर परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

नन्दा चौक में साल का आखिरी पवित्र गाडू स्नान भी संपन्न कराया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र स्नान का विशेष महत्व है। ग्रामीणों ने पूरी आस्था के साथ इस परंपरा में भाग लिया और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया।

पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान मां नन्दा सहित अन्य देवी-देवताओं के जयकारे लगातार गूंजते रहे। पूरी बामणी घाटी “जय मां नन्दा” और “जय कुबेर देवता” के जयघोष से भक्तिमय हो गई।

अनुष्ठान के समापन पर मां नन्दा सहित सभी देवी-देवताओं से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवी-देवताओं को विदाई दी गई।

पवित्र स्नान और अन्य धार्मिक विधियां पूरी होने के बाद भगवान कुबेर की उत्सव डोली वापस श्री बद्रीनाथ मंदिर के लिए रवाना हो गई। ग्रामीणों ने श्रद्धा के साथ डोली को विदा किया और अगले वर्ष फिर दर्शन की कामना की।

भगवान कुबेर की उत्सव डोली के वापस बदरीनाथ मंदिर लौटने के साथ ही बामणी गांव में आयोजित नन्दा अष्टमी पर्व का विधिवत समापन हो गया। सदियों पुरानी इस धार्मिक परंपरा ने एक बार फिर बद्रीनाथ धाम की समृद्ध संस्कृति, लोक आस्था और देव परंपराओं की अनूठी झलक प्रस्तुत की।